शादी के सात फेरों और सात फेरों में लिए गए बचन का क्या है प्रयोजन

सनातन संस्कृति में मनुष्य पूर्ण तभी होता है जब उसका विवाह संस्कार होता है । हमारे यहाँ विवाह कोई कार्यक्रम नही एक संस्कार है ।

गृहस्त आश्रम की शुरुआत इसी संस्कार के पश्चात होती है ।

विवाह से पूर्व स्त्री या पुरुष को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है ।

आज के लेख में हम आपको विवाह में लिए जाने वाले सात फेरों के वचन के विषय मे बताएंगे , आपको यह बताएंगे क्या होता है इन वचनों का मतलब और यह विवाह संस्कार में क्यूँ शामिल है ।

16 संस्कारो में एक संस्कार विवाह संस्कार अटूट है , वर्तमान में अनेक सनातनी तलाक ले रहे हैं यह धर्म विरुद्ध आचरण है ।

जिसका परिणाम भी उन लोगो को भुगतना पड़ता है । जन्म , मरण और विवाह ये तीनो ऊपर से निश्चित है जो भी प्रकृति के अनुशासन तोड़ेगा उसे फल तो भुगतना ही होगा ।

अब आपको विवाह के उन सात वचनों के विषय मे बताते हैं ।

पहला वचन
पहला वचन लड़की को धर्म पत्नी बनाता है ।

वचन स्वरूप यह कहा जाता कि आज से कोई भी धार्मिक , मांगलिक क्रिया आप मेरे बिना नही करेंगे यह स्वीकार्य है ।

जिसे लड़का स्वीकार्य करता है जिस कारण विवाहिता को धर्म पत्नी कहा जाता है ।

पत्नी के बिना किये गए धर्म कार्य का फल नही मिलता है ।

दूसरा वचन

दूसरा वचन लड़का से लड़की लेती है जिसमे वह नए जुड़ने वाले संबंध के सम्मान करने के लिए कहती है ।

जिसे लड़का स्वीकार्य करता है तब लड़की लड़के के बाँया भाग में आ जाती है ।

जिस कारण पत्नी को वामांगी कहा जाता है ।

तीसरे वचन
तीसरे वचन में लड़की हर स्थिति में हर काल मे साथ रहने का वचन माँगती है ।

जिसे लड़का स्वीकार्य करता है । इसीलिए पत्नी को जीवनसाथी कहा जाता है ।

चौथा वचन

लड़की , लड़के से वचन लेती है जिम्मेदारी उठाने की ।
सभी आवश्यकताओ की पूर्ति अपना कर्तव्य समझेंगे जिसे लड़का स्वीकार्य करता है इसलिए पत्नी को भार्या कहा जाता है ।

पांचवा वचन
लड़की ,लड़के से यह प्रतिज्ञा लेती है कि आप जीवन के किसी भी कार्य मे मेरे से सलाह अवश्य लेंगे ।

मेरे से आज्ञा लिए बिना आप कोई कार्य नही करेंगे ।

जब लड़का इसे स्वीकार्य करता है तब विवाहिता बन जाती है अर्धांगनी ।

छठवां वचन

लड़की ,लड़के से यह वचन लेती है किसी के सामने आप मेरा अपमान न करेंगे , आप के जीवन मे हम से महत्वपूर्ण कोई नही होगा ।

जब लड़का यह स्वीकार्य कर लेता है तब विवाहिता बन जाती है गृहलक्ष्मी ।

सांतवा वचन

अंतिम वचन स्वरूप वह लड़का से कहती है कि आप मेरे अलावा सभी स्त्री में माँ , बहन का रूप देखेंगे ।

हमारा प्रेम किसी से नही बाटेंगे ।

जब लड़का स्वीकार्य करता है तब विवाहिता कहलाती है पत्नी ।

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