दुर्गा सप्तशती का पथ करते समय रखें इन बैटन का ध्यान

दुर्गा सप्तशती का पाठ हर सनातनी घर में अनिवार्य रूप से होना चाहिए यह आपके घर को परिवार को सभी प्रकार के समस्याओं से बचाये रखेगी ।

दुर्गा सप्तशती के पाठ से भारी मात्रा में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है जो आपके तन और मन मे सकारात्मक ऊर्जा भर देती है जो आपको आत्मविश्वास प्रदान करती है जिसके दम पर आप सफलता के झंडे गारते हैं ।

आज के लेख में हम आपको दुर्गा सप्तशती के महत्व के विषय मे बताएंगे दुर्गासप्तशती के सिद्धिकरन के विषय मे बताएंगे साथ साथ उन पाँच बातों के विषय मे बताएंगे जिनका ध्यान रखना अनिवार्य है ।

सर्वप्रथम हम आपको बताते हैं दुर्गा सप्तशती के महत्व के विषय मे :-
दुर्गा सप्तशती के पाठ से आंतरिक शुद्धि होती है , आपके हृदय में उपस्थित विकार का नाश होता है । दुर्गासप्तशती में श्लोकों को इस प्रकार से बनाया गया है जिस से भारी मात्रा में पॉजिटिव एनर्जी का प्रसार हो ।

जब आपकी आंतरिक शुद्धि होगी तब आपके हृदय में उपस्थित विकार का नाश हो जाएगा और मनुष्य के दुःखों का कारण हृदय में उपस्थित विकार ही है ।

इस से निकलने वाली पॉजिटिव एनर्जी आपको आत्मविश्वास और सही दिशा में बढ़ने की शक्ति देगी ।

दुर्गा सप्तशती सिद्धिकरण विधि :-
दुर्गा सप्तशती के सिद्धिकरन के लिए आप सूर्योदय से पहले शौच , स्नान आदि कार्य से निवृत होकर स्वक्ष वस्त्र धारण करें । लाल वस्त्र पर माँ दुर्गा को विराजमान करें फिर आप अक्षत , कुम कुम और लाल पुष्प से माँ का श्रृंगार करें । माता रानी के लिए पकवानों का प्रसाद बनाएं । इसके बाद धूप और दिया जला कर लाल पुष्प और अक्षत हाथ मे लेकर मंत्रों का जाप करें ।

अंत मे आपको बताते हैं किन पाँच  बातों का ध्यान रखना परम आवश्यक है :-

1.पाठ करते वक़्त उच्चारण साफ होना चाहिए और लय टूटना नही चाहिए ।

2. स्वक्षता पर विशेस ध्यान रखें पैरों या दूसरे चीजो का स्पर्श न करें ।

3. पाठ करते वक़्त कुश का आसन सर्वोत्तम है ।

4. पाठ करते वक़्त जो वस्त्र धारण करें वो अखंड हो उसमे सिलाई नही हुई हो ।

5.मन एकाग्र होना परम आवश्यक है ।

Close Bitnami banner
Bitnami